प्राथमिक शिक्षक भर्ती में काउंसलिंग पर विवाद, कम मेरिट चयन से कानूनी अड़चनें
उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया इन दिनों विवादों के घेरे में है। शिक्षा विभाग द्वारा सभी जिलों में एक साथ काउंसलिंग कराए जाने के फैसले ने भर्ती व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के चलते मेरिट क्रम का पालन ठीक से नहीं हो पाया, जिससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है।
कई जिलों से सामने आया है कि कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए चुन लिया गया, जबकि अधिक अंक और उच्च मेरिट रखने वाले उम्मीदवार काउंसलिंग में शामिल नहीं हो सके। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही और गलत नियोजन के आरोप लगाए हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि काउंसलिंग जिलेवार और चरणबद्ध तरीके से कराई जाती, तो इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती। एक ही दिन सभी जिलों में काउंसलिंग होने से उम्मीदवारों को विकल्प चुनने में परेशानी हुई और कई स्थानों पर सीटें ऐसे अभ्यर्थियों को मिल गईं, जिनकी मेरिट अपेक्षाकृत कम थी।
इस पूरे मामले में अब कानूनी दखल की आशंका भी जताई जा रही है। कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए न्यायालय की शरण लेने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यदि मेरिट के आधार पर दोबारा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, तो यह भर्ती लंबे समय तक अटक सकती है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि काउंसलिंग प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है और मेरिट सूची वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि, अभ्यर्थी इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल प्राथमिक शिक्षक भर्ती का यह विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला अदालत और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती बन सकता है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका है।