Friday, March 6News That Matters

Day: January 4, 2023

दिल्ली के कंझावला कांड को समझिए दो हिस्सों में, एक्सीडेंट के पहले और उसके बाद साथ ही कई सवाल |

दिल्ली के कंझावला कांड को समझिए दो हिस्सों में, एक्सीडेंट के पहले और उसके बाद साथ ही कई सवाल |

क्राइम, दिल्ली
दिल्ली के कंझावला कांड को समझिए दो हिस्सों में, एक्सीडेंट के पहले और उसके बाद साथ ही कई सवाल | दिल्ली के कंझावला कांड में जिस तरह से एक युवती को कार सवार आरोपियों ने 13 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक कार से घसीटा उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, कई नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे मामले की इकलौती चश्मदीद गवाह मृतका की सहेली के बयान के बाद इस मामले में एक नई बहस छिड़ गई है। जहां एक पक्ष आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहा है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मृतका चरित्र पर प्रश्न उठा रहे हैं। ऐसे में इस पूरी घटना को दो हिस्सों में समझने की जरूरत है। एक हादसे से पहले की घटनाएं और दूसरा जिसमें स्कूटी और कार के एक्सीडेंट के बाद क्या हुआ वह हिस्सा होगा। आइए जानते हैं इस पूरे मामले में अब क्या-क्या सवाल उठ रहे हैं। स्कूटी और कार के एक्सीडेंट से पहले...
जागो ग्राहक जागो, सिनेमा पर भी उपभोक्ता कानून लागू करने की राह दिखाती ‘हिंदी’ फिल्म |

जागो ग्राहक जागो, सिनेमा पर भी उपभोक्ता कानून लागू करने की राह दिखाती ‘हिंदी’ फिल्म |

मनोरंजन
जागो ग्राहक जागो, सिनेमा पर भी उपभोक्ता कानून लागू करने की राह दिखाती ‘हिंदी’ फिल्म | बीते साल के अंत से लेकर नए साल की शुरुआत के शुक्रवार तक हिंदी सिनेमा के दर्शकों का हाल वैसा ही है। क्रिसमस पर ‘सर्कस’ और नए साल पर ‘द वाय’। साल 2023 की ये पहली रिलीज हिंदी फिल्म बताई जा रही है लेकिन किसी भी कोने से इसके हिंदी फिल्म होने का अनुमान होना मुश्किल है। कन्नड़ फिल्में बनाने वाले निर्देशक हैं। दक्षिण के ही सितारे हैं। इसके पहले कभी इस फिल्म की कहीं कोई चर्चा तक नहीं हुई। लेकिन दावा यही है कि ये फिल्म हिंदी में बनी है। अब सिनेमा ऐसा उद्योग है जिसके उत्पाद पर आईएसआई मार्का टाइप कहीं से कोई ठप्पा भी नहीं लग सकता। जो फिल्म बनाने वाले या फिर इसका प्रचार करने वाले बता दें, उसे ही सच मानना पड़ता है। साल का पहला शुक्रवार वैसे भी भगवान भरोसे ही रहता रहा है। कोई बड़ी फिल्म इस दिन आती नहीं है तो इस साल ज...
सूजी आंखें…बिखरे बाल…उर्फी को ये क्या हुआ? कैमरा देख क्यों मुंह छिपाने लगीं एक्ट्रे |

सूजी आंखें…बिखरे बाल…उर्फी को ये क्या हुआ? कैमरा देख क्यों मुंह छिपाने लगीं एक्ट्रे |

मनोरंजन
सूजी आंखें...बिखरे बाल...उर्फी को ये क्या हुआ? कैमरा देख क्यों मुंह छिपाने लगीं एक्ट्रे | उर्फी जावेद अक्सर अपने अतरंगी कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल होती हैं। पिछले दिन वह बिकिनी पर चूड़ियों से बनी ड्रेस पहने नजर आई थीं। जिसके बाद एकबार फिर उनको सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया था। उर्फी अपने हर लुक में खूब सजी-धजी नजर आती हैं। लेकिन हाल ही में जो उर्फी का नया लुक सामने आया है, उसमें उनका लुक काफी अजीब है। इस वीडियो में उर्फी के बाल बिखरे हैं और उनकी आंखे सूजी हुई हैं। वीडियो देखने के बाद फैंस भी सवाल पूछ रहे हैं। बीती रात उर्फी जावेद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उर्फी का नो मेकअप लुक नजर आ रहा है। इस वीडियो में उन्होंने हरे रंग की टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहन रखा था। इस दौरान उर्फी की आंखें सूजी हुई थीं और वह लड़खड़ा भी रही थीं, ऐसा लग रहा था कि...
चीन की तरफ से ही होती है भारत-तिब्बत सीमा पर घुसपैठ, विवाद सुलझाने के पक्ष में नहीं ड्रैगन |

चीन की तरफ से ही होती है भारत-तिब्बत सीमा पर घुसपैठ, विवाद सुलझाने के पक्ष में नहीं ड्रैगन |

देश-विदेश
चीन की तरफ से ही होती है भारत-तिब्बत सीमा पर घुसपैठ, विवाद सुलझाने के पक्ष में नहीं ड्रैगन | पेनपा शेरिंग ने भारत-तिब्बत सीमा पर घुसपैठ के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, सीमा पर सभी घुसपैठ एकपक्षीय रही हैं और चीन ने ही की हैं। तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख या सिक्योंग, पेनपा शेरिंग ने भारत-तिब्बत सीमा पर घुसपैठ के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, सीमा पर सभी घुसपैठ एकपक्षीय रही हैं और चीन ने ही की हैं। शेरिंग ने कहा कि तिब्बत ने 1914 की संधि पर हस्ताक्षर किये थे, जिसमें उसके और भारत के बीच मैकमोहन लाइन पर सीमा निर्धारित की गयी। उन्होंने कहा कि तब से तवांग भारत का अभिन्न हिस्सा है। तवांग और लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच संघर्ष पर उन्होंने कहा, 1959 तक भारत और चीन के बीच कोई सीमा नहीं थी, तिब्बत के साथ थी। उन्होंने कहा, हम 1914 के शिमला समझौ...
हर घर नल से जल पहुंचाने में यूपी और झारखंड से आगे उत्तराखंड, जल जीवन सर्वेक्षण के आंकड़े जारी |

हर घर नल से जल पहुंचाने में यूपी और झारखंड से आगे उत्तराखंड, जल जीवन सर्वेक्षण के आंकड़े जारी |

देहरादून
हर घर नल से जल पहुंचाने में यूपी और झारखंड से आगे उत्तराखंड, जल जीवन सर्वेक्षण के आंकड़े जारी | जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी से प्रगति हो रही है। उत्तराखंड का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर लगातार तीसरे महीने सुधरा है। इस बार उत्तराखंड जहां 50 से 75 प्रतिशत श्रेणी में आठवीं रैंक पर है तो उत्तर प्रदेश 25 से 50 प्रतिशत श्रेणी में तीसरे स्थान पर है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के मामले में उत्तराखंड की रैंकिंग, यूपी और झारखंड से भी ऊपर है। जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन सर्वेक्षण के दिसंबर के आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें अब प्रदेश का एक भी जिला 50 प्रतिशत से नीचे नहीं रहा है। जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन के कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए जल सर्वेक्षण की शुरुआत की थी। उत्तराखंड का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर लगातार तीसरे महीने सुधरा है। इस बार उत्तराखंड जहां 50 से...
रोजगार के लिए हरिद्वार में भी गांवों से हो रहा पलायन, आयोग ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट |

रोजगार के लिए हरिद्वार में भी गांवों से हो रहा पलायन, आयोग ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट |

उत्तराखण्ड
रोजगार के लिए हरिद्वार में भी गांवों से हो रहा पलायन, आयोग ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट | जिले में बेरोजगारी के साथ सिमटती कृषि जोत, बदहाल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पलायन का प्रमुख कारण हैं। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं का अस्थायी रूप से पलायन फैक्टरियों एवं आस-पास के शहरों में रोजगार के लिए हो रहा है। अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में भी पलायन हो रहा है। उत्तराखंड के पर्वतीय ही नहीं मैदानी जिले भी पलायन की समस्या का सामना कर रहे हैं। हालांकि मैदानों में यह अस्थाई है। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की हरिद्वार जिले पर आई रिपोर्ट इसकी तस्दीक कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार एक दशक में हरिद्वार के नगरीय क्षेत्रों में 55 प्रतिशत आबादी बढ़ी। आयोग का मानना है कि इसमें बहुत बड़ी संख्या उन लोगों की है जो रोजगार के लिए अस्थायी रूप से गांव छोड़ शह...