टिहरी में ‘जन-जन की सरकार’ शिविरों की प्रगति पर प्रशासन सख्त, डीएम ने लंबित मामलों पर जताई नाराज़गी
टिहरी जिले में आयोजित ‘जन-जन की सरकार’ शिविरों की प्रभावशीलता को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों द्वारा शिविरों में प्राप्त शिकायतों और समस्याओं के निस्तारण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का उद्देश्य जनसमस्याओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना रहा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि शिविरों का मूल मकसद आम जनता को राहत पहुंचाना है, न कि केवल औपचारिकता निभाना। उन्होंने कई विभागों में लंबित मामलों पर नाराज़गी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन मामलों में प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई, वहां जवाबदेही तय करने के संकेत भी दिए गए।
बैठक में बताया गया कि राजस्व, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे विभागों से जुड़ी शिकायतें बड़ी संख्या में सामने आई हैं। डीएम ने निर्देश दिए कि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ शीघ्र दिया जाए और अपात्र मामलों में स्पष्ट कारण सहित सूचना दी जाए, ताकि जनता में भ्रम की स्थिति न बने।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि शिविरों में प्राप्त समस्याओं का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर ज़मीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्रीय भ्रमण बढ़ाने, फील्ड रिपोर्ट मजबूत करने और आम लोगों से सीधे संवाद करने पर जोर दिया।
समीक्षा बैठक के दौरान यह भी निर्देश दिए गए कि अगली बैठक से पहले सभी विभाग अपने-अपने कार्यों की अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
प्रशासन का मानना है कि ‘जन-जन की सरकार’ अभियान तभी सफल होगा, जब जनता को समय पर न्याय, सुविधा और समाधान मिलेगा। इस दिशा में टिहरी जिला प्रशासन ने निगरानी और सख्ती दोनों को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।