देहरादून। राजधानी देहरादून में परिवहन विभाग ने नियम विरुद्ध तरीके से संचालित हो रही बाइक टैक्सी कंपनी रैपिडो (Rapido) के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है। शुक्रवार को संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) श्री संदीप सैनी के नेतृत्व में विभाग की टीम ने कंपनी के कार्यालय पर औचक छापेमारी की। निरीक्षण के दौरान भारी अनियमितताएं मिलने पर विभाग ने कंपनी का एग्रीगेटर लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की है।
आरटीओ की जांच में सामने आया कि कंपनी ने कैनाल रोड स्थित अपना मुख्य कार्यालय बिना किसी पूर्व सूचना के रिंग रोड पर शिफ्ट कर दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि कंपनी का कार्यालय एक पुराने रेस्टोरेंट से संचालित होता पाया गया। पते में बदलाव की जानकारी विभाग को न होने के कारण पिछले कुछ समय से कंपनी के साथ पत्राचार संभव नहीं हो पा रहा था।
लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि रैपिडो द्वारा निजी (सफेद नंबर प्लेट) दोपहिया वाहनों को अपनी ऐप में रजिस्टर किया जा रहा है। यह मोटर वाहन अधिनियम और एग्रीगेटर लाइसेंस की शर्तों का सीधा उल्लंघन है। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि राज्य सरकार को भारी राजस्व की हानि भी हो रही है। साथ ही, इन चालकों का कोई सत्यापन रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
पेमेंट फ्रॉड की शिकायत: उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि कंपनी बुक की गई गाड़ी के बजाय दूसरी गाड़ी भेजती है और एडवांस पेमेंट ले लेती है।
प्राइसिंग सिस्टम में पारदर्शिता का अभाव: कंपनी ने आज तक विभाग के साथ अपना प्राइस कैलकुलेशन सिस्टम (Algorithm) साझा नहीं किया।
राजस्व की चोरी: लाइसेंस की शर्तों के अनुसार, प्रति राइड 2% राजस्व सरकार को देना था, जो कंपनी ने अभी तक जमा नहीं किया है।
डेटा छिपाना: विभाग को यह जानकारी भी नहीं दी गई कि ऐप पर कुल कितने वाहन रजिस्टर्ड हैं।
लाइसेंस निलंबन की तैयारी और सख्त निर्देश
आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि कंपनी के सहायक मैनेजर और ऑपरेशन मैनेजर की मौजूदगी में यह कार्रवाई की गई। विभाग अब STA (State Transport Authority) को रैपिडो का लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति भेज रहा है।
विभाग ने रैपिडो को अपनी ऐप से सभी निजी वाहनों को तुरंत डी-एक्टिवेट करने के निर्देश दिए हैं। यदि कंपनी जनता और वाहन स्वामियों को गुमराह करना बंद नहीं करती, तो उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में कठोर विधिक कार्यवाही की जाएगी।