कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, लोकसभा जांच के बीच उठाया बड़ा कदम
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश Yashwant Varma ने कथित कैश कांड विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र भारत के राष्ट्रपति को भेजते हुए कहा कि “गहरी पीड़ा के साथ मैं तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं।” इस पत्र की प्रति भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant को भी भेजी गई है।
जस्टिस वर्मा ने अपने पत्र में इस्तीफे के कारणों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने न्यायपालिका में सेवा करना अपने लिए सम्मान की बात बताया। उनका इस्तीफा उस समय आया है जब उनके खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव को लेकर जांच प्रक्रिया जारी थी।
लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने जज (इंक्वायरी) एक्ट 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस Arvind Kumar, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Shree Chandrashekhar और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता Vasudeva Acharya शामिल थे।
पूरा मामला 14 मार्च 2025 को सामने आया था, जब दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास के एक हिस्से में आग बुझाने के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने का दावा किया गया था। इस घटना के बाद विवाद बढ़ गया और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश Sanjiv Khanna ने आंतरिक जांच के आदेश दिए थे।
जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया जस्टिस वर्मा की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं, जिनमें उन्होंने जांच प्रक्रिया और लोकसभा द्वारा गठित समिति को चुनौती दी थी।
बताया जा रहा है कि 146 सांसदों द्वारा महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने के बाद जांच तेज हुई थी। अब उनके इस्तीफे से इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और न्यायपालिका में पारदर्शिता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।