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स्व. उमेश चन्द्र दुबे की एक रचना… पहला श्रोता

स्व. उमेश चन्द्र दुबे की एक रचना… पहला श्रोता

राष्ट्रीय
स्व. उमेश चन्द्र दुबे मैनपुरी, उत्तर-प्रदेश ------------------------------------------- पहला श्रोता जिसके मुख पर आते जाते भावों में मेरे छन्द बदल देने की क्षमता है जिसके विविध विचार विवेचन की विधि में मेरे मन मस्तिष्क सरीखी समता है जिसकी सार भरी मुस्कानों के आँगन मेरी लय पायल बाँधे छम छम नाचे जिसकी मुक्त कंठ आशीष अभी जनमें अनगाए गीतों का भाग्य-पटल बाँचे पहली पहली बार उसी के ओठों से कुछ पा लेने का आकर्षण होता है । जागरूक मन से सन्मुख बैठा वह ही मेरा पहला पहला श्रोता है। उसके सन्मुख नूतन भाव भावना को सौ श्रृंगार किए सन्तोष नहीं होता उसके आगे क्वाँरी शब्दावलियों को वस्त्रहीन होने में दोष नहीं लगता वह कह दे तो उठती हुई गुनगुनाहट शब्दों की दुनिया को बेपरदा कर दे वह चाहे भावुक अन्तर की आकुलता पंक्तिबद्ध हो सरगम से सौदा कर ले । उसके तनिक उदास विमुख मन का चेहरा ...