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Day: July 19, 2021

उत्तरकाशी में फटा बादल, तीन लोगों की मौत

उत्तरकाशी में फटा बादल, तीन लोगों की मौत

उत्तराखण्ड
-उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद आए मलबे के कारण तीन लोगों की मौत हो चुकी है। एसडीआरएफ राहत व बचाव कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। शब्द रथ न्यूज, ब्यूरो (shabd rath news)। उत्तराखंड में बारिश के बाद पहाड़ों में नदियां उफान पर हैं। भारी बारिश के बीच उत्तरकाशी में कल देर रात बादल फट गया। हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। मांडो में 2 महिला व एक बच्चे का शव बरामद किया गया है। शवों को जिला अस्पताल में लाया गया है। मांडो गांव में अभी भी चार लोग लापता हैं। भारी बरसात के कारण अचानक भागीरथी नदी समेत गाड़-गदेरे उफान पर आ गए हैं। बादल फटने से गांव मांडो, निराकोट, पनवाड़ी और कंकराड़ी के आवासीय घरों में पानी घुस गया। साथ ही गदेरा उफान पर आने से तीन लोग मलबे में फंसकर घायल हो गए। घायलों को पहुंचाया अस्पताल एसडीआरएफ व आपदा प्रबंधन वि...

वरिष्ठ कवि जय कुमार भारद्वाज का एक सुंदर गीत…

राष्ट्रीय
जय कुमार भारद्वाज देहरादून, उत्तराखंड --------------------------------------------- पेड़ --------------- जीवन जग को देता पेड़। जग से है क्या लेता पेड़? शीतल सुखद सुहानी छाया उसने धरती पर बिखरायी थके हुए राही की मंज़िल है जिसने आसान बनायी सबका सच्चा साथी पेड़ । जग से है क्या लेता पेड़? हम फल फूल उसी से पाते जड़ी बूटियाँ उसकी खाते इतना सब कुछ देता फिरभी रहता हर दम हँसते गाते पक्षी का घर होता पेड़। जग से है क्या लेता पेड़? वह धरती का रूप सजाता मुस्कानों के फूल खिलता धूप की चादर ओढ़ी फिर भी शीतल मन्द समीर बहाता जन मन को हर्षाता पेड़ जग से है क्या लेता पेड़? बादल से लाता है पानी धरती को करता है धानी पास नहीं रखता कुछ अपने वीर करण से देखो दानी पर हित जीवन जीता पेड़।। जग से है क्या लेता पेड़?...
श्रेष्ठता व स्वच्छता के साथ कर्म करना ही योग

श्रेष्ठता व स्वच्छता के साथ कर्म करना ही योग

आध्यात्मिक
भगवद चिन्तन योगस्थ: कुरुकर्माणि संगं त्यक्त्वा धनंजय सिद्धय सिद्धयो:समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते! हमारे व्यावहारिक जीवन में योग का क्या साधन है अथवा व्यावहारिक जीवन में योग को कैसे जोड़ें? इसका श्रेष्ठ उत्तर केवल गीता के इन सूत्रों के अलावा कहीं और नहीं मिल सकता है। गुफा और कन्दराओं में बैठकर की जाने वाली साधना ही योग नहीं है। हम अपने जीवन में, अपने कर्मों को कितनी श्रेष्ठता के साथ करते हैं, कितनी स्वच्छता के साथ करते हैं बस यही तो योग है। गीता जी तो कहती हैं कि किसी वस्तु की प्राप्ति पर आपको अभिमान न हो और किसी के छूट जाने पर दुःख भी न हो। सफलता मिले तो भी नजर जमीन पर रहे और असफलता मिले तो पैरों के नीचे से जमीन काँपने न लग जाये। बस दोंनो परिस्थितियों में एक सा भाव ही तो योग है। यह समभाव ही तो योग है।...