Saturday, June 20News That Matters

Day: July 30, 2021

 जसबीर सिंह ‘हलधर’ … जिंदगी कड़े तेबर तेरे, फिर भी तू सबको भाती है!

राष्ट्रीय
जसबीर सिंह 'हलधर' देहरादून, उत्तराखंड ------------------------------------------- कविता -जिंदगी --------------------- जिंदगी कड़े तेबर तेरे, फिर भी तू सबको भाती है! जो जैसा है जो भी कुछ है ,तू सबको गले लगाती है!! पिंजड़े में फँसकर देख लिया, विपदा में हँसकर देख लिया! सौ बार नदी को पार किया, दलदल में धँसकर देख लिया! तू मानस का हर मौके पर, भेजा भी खूब चबाती है! जो जैसा है जो भी कुछ है, तू सबको गले लगाती है!!1!! जागें सब तेरे संग संग, भागें सब तेरे संग संग! साँसों का माँझा बना रखा, डोरी हैं सब तू है पतंग! तू कब कट के गिर जाएगी, हर पग पर राज छुपाती है! जो जैसा है जो भी कुछ है, तू सबको गले लगाती है!!2!! तू कभी महकती बाहों में, तू कभी चहकती राहों में! नखरे भी तेरे बहुत बड़े, तू कभी दहकती आहों में! आँसू आँखों में खारे है, मीठी भी नींद सुलाती है! जो जैसा जो भी कुछ है, ...
“पागल फ़क़ीरा”… क्षितिज पर दूर सूरज चमका, सुबह खड़ी है आने को..

“पागल फ़क़ीरा”… क्षितिज पर दूर सूरज चमका, सुबह खड़ी है आने को..

राष्ट्रीय
"पागल फ़क़ीरा" भावनगर, गुजरात --------------------------------------- क्षितिज पर दूर सूरज चमका, सुबह खड़ी है आने को, धुंध हटेगी, धूप खिलेगी, फिर दिन नया है छाने को। साहिल पर बैठे बैठे डरते रहने से क्या होगा दोस्त, लहरों से लड़ना होगा उस पार समन्दर जाने को। प्यार इश्क़ तो है पुरानी बातें, कैसे इनसे नज़्में सजे, आज की क़लम वो दर्द लाई सोती रूह जगाने को। दिन गुज़रा याद दिलाता है, भूली बिसरी बातें अब, सुर नया हो, ताल नया हो, गाये नये अफ़साने को। ख़ुद के हाथों की लक़ीरों को तू करले ख़ुद के बस में, "फ़क़ीरा" तेरी रूठी तक़दीर कौन आये उसे मनाने को।  ...

नीरज नैथानी….. कुशला फूफू के आ जाने का मतलब था जच्चा-बच्चा की खैरियत

राष्ट्रीय
नीरज नैथानी रुड़की, उत्तराखंड मेरे गांव में बीमारियों का इलाज साथियों पिछली बार मैंने आपको बताया कि जब हमारे गांव में सड़क नहीं पहुंची थी तो किसी बीमार को डाक्टर के पास दिखाने के लिए पिनस पर ले जाते थे। लेकिन, मैं जिक्र करना भूल गया कि डाक्टर के पास ले जाने की नौबत ही बहुत कम आती थी। अब आप इसका यह मतलब कतई न निकालिएगा कि हमारे गांव में कोई बीमार ही नहीं पड़ता था। गाहे-बगाहे मौसम का मिजाज बदलने पर या बदपरहेजी होने की वजह से लोगों की तवियत बिगड़ा ही करती थी। उस जमाने में गांव में न तो राजकीय प्राथमिक चिकित्सा केंद्र (पीएचसी), न  डाक्टर, न कम्पाउंडर और न ही कोई मेडिकल स्टोर हुआ करता था। लेकिन, हर बीमारी के इलाज के पारम्परिक तरीके जरूर हुआ करते थे। मसलन, किसी घर में बहू को प्रसव होना‌ है तो गांव की कुशला फूफू की सेवाएं ली जाती थीं। साठ-पैंसठ के आसपास की उम्र की कुशला फूफू पास...
बिना विष पीये, विषमता को पचाए कोई भी महान नहीं बनता

बिना विष पीये, विषमता को पचाए कोई भी महान नहीं बनता

आध्यात्मिक
 भगवद चिन्तन... श्रावण मास शिव तत्व देवाधिदेव भगवान आशुतोष के जीवन से इस श्रावण मास में पूजन करते-करते कुछ सीखने और समझने योग्य है। ये महादेव कैसे हुए? जो अमृत पीते हैं वो देव बनते हैं जो राष्ट्र, समाज और प्रकृति की रक्षा के लिए विष को भी प्रेम से पी जाएँ वो महादेव बन जाते हैं। बिना विष को पीये, विषमता को पचाए कोई भी महान नहीं बन सकता। आज के समय में अमृत की चाह तो सबको है, पर विष की नहीं। बिना विष को स्वीकारे कोई अमृत तक नहीं पहुँच सकता है। संघर्ष, दुःख, प्रतिकूल परिस्थिति, अभाव ये सब तुम्हें निखार रहे हैं। समस्या को स्वीकार करना ही समस्या का समाधान है। कोई भी समस्या तब तक ही है जब तक आप उससे डरते हो और उसका सामना करने से बचते हो। मनुष्य के संकल्प के सामने बड़ी से बड़ी चुनौती भी छोटी हो जाती है।...