Tuesday, September 22News That Matters

6 महीने बाद हरीश रावत की वापसी, देहरादून में शक्ति प्रदर्शन

लंबे समय से स्वास्थ्य कारणों के चलते सक्रिय राजनीति से दूर रहे पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत करीब छह महीने बाद उत्तराखंड लौटे हैं। दिल्ली से वापसी के साथ ही रावत की सियासी सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। 20 सितंबर को उत्तराखंड पहुंचने के बाद उनका जगह-जगह कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। इसके बाद आज देहरादून में भी रावत अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नजर आए। घंटाघर स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा और उत्तराखंड आंदोलन के प्रणेता इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर उन्होंने माल्यार्पण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। रावत ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि वे आज भी वैसे ही हैं, जैसे चार साल पहले थे। उन्होंने कहा कि वे न टाइगर हैं, न चूहा और न भीगी बिल्ली—वह हरीश रावत हैं और हरीश रावत ही रहेंगे।
हरीश रावत ने कहा कि लंबे समय में कई परिस्थितियां उनके सामने आईं, लेकिन उनके व्यवहार में कभी बदलाव नहीं आया। उन्होंने इस कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देने का कार्यक्रम है। दिल्ली से लौटने के बाद रावत ने सोमवार को देहरादून के चार सिद्धपीठों के दर्शन भी किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी जो निर्णय करेगी, उसके अनुरूप वह काम करेंगे। करीब छह महीने बाद उत्तराखंड लौटे हरीश रावत की लगातार बढ़ती सक्रियता ने प्रदेश की सियासत में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। हालांकि रावत अपने कार्यक्रमों को कार्यकर्ताओं से संवाद और उन्हें धन्यवाद देने का हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर संगठन और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं।