Friday, February 27News That Matters

राष्ट्रीय

ममता बनर्जी और जावेद अख्तर मिले… जावेद बोले .. देश में परिवर्तन की जरूरत

ममता बनर्जी और जावेद अख्तर मिले… जावेद बोले .. देश में परिवर्तन की जरूरत

राजनीतिक, राष्ट्रीय
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली दौरे के दौरान राजनीतिक व सामाजिक लोगों से मुलाकात की। इसी कड़ी में ममता बनर्जी और मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर भी मिले। दोनों के बीच करीब 40 मिनट तक चर्चा हुई। शब्द रथ न्यूज, ब्यूरो (shabd rath news)। गीतकार जावेद अख्तर और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दिल्ली में गुरुवार को मुलाकात हुई। जावेद के आवास पर हुई मुलाकात में उनकी पत्नी शबाना आजमी भी मौजूद थी। 'परिवर्तन' की आवश्यकता पर बात करते हुए जावेद अख्तर कहा कि बंगाल ने हमेशा 'क्रांतिकारी आंदोलनों' का नेतृत्व किया है। सभी के लिए तो नहीं कह सकता, लेकिन व्यक्तिगत रूप से, मुझे लगता है कि 'परिवर्तन' होना चाहिए। लोकतंत्र स्थिर नहीं रह सकता। जावेद अख्तर ने कहा कि देश इस वक्त कई समस्याओं से जूझ रहा है। ध्रुवीकरण का मुद्दा हो या लोगों के भड़काऊ बयान इन मुद्दों को लेकर देश में तनाव का...

 जसबीर सिंह ‘हलधर’ … जिंदगी कड़े तेबर तेरे, फिर भी तू सबको भाती है!

राष्ट्रीय
जसबीर सिंह 'हलधर' देहरादून, उत्तराखंड ------------------------------------------- कविता -जिंदगी --------------------- जिंदगी कड़े तेबर तेरे, फिर भी तू सबको भाती है! जो जैसा है जो भी कुछ है ,तू सबको गले लगाती है!! पिंजड़े में फँसकर देख लिया, विपदा में हँसकर देख लिया! सौ बार नदी को पार किया, दलदल में धँसकर देख लिया! तू मानस का हर मौके पर, भेजा भी खूब चबाती है! जो जैसा है जो भी कुछ है, तू सबको गले लगाती है!!1!! जागें सब तेरे संग संग, भागें सब तेरे संग संग! साँसों का माँझा बना रखा, डोरी हैं सब तू है पतंग! तू कब कट के गिर जाएगी, हर पग पर राज छुपाती है! जो जैसा है जो भी कुछ है, तू सबको गले लगाती है!!2!! तू कभी महकती बाहों में, तू कभी चहकती राहों में! नखरे भी तेरे बहुत बड़े, तू कभी दहकती आहों में! आँसू आँखों में खारे है, मीठी भी नींद सुलाती है! जो जैसा जो भी कुछ है, ...
“पागल फ़क़ीरा”… क्षितिज पर दूर सूरज चमका, सुबह खड़ी है आने को..

“पागल फ़क़ीरा”… क्षितिज पर दूर सूरज चमका, सुबह खड़ी है आने को..

राष्ट्रीय
"पागल फ़क़ीरा" भावनगर, गुजरात --------------------------------------- क्षितिज पर दूर सूरज चमका, सुबह खड़ी है आने को, धुंध हटेगी, धूप खिलेगी, फिर दिन नया है छाने को। साहिल पर बैठे बैठे डरते रहने से क्या होगा दोस्त, लहरों से लड़ना होगा उस पार समन्दर जाने को। प्यार इश्क़ तो है पुरानी बातें, कैसे इनसे नज़्में सजे, आज की क़लम वो दर्द लाई सोती रूह जगाने को। दिन गुज़रा याद दिलाता है, भूली बिसरी बातें अब, सुर नया हो, ताल नया हो, गाये नये अफ़साने को। ख़ुद के हाथों की लक़ीरों को तू करले ख़ुद के बस में, "फ़क़ीरा" तेरी रूठी तक़दीर कौन आये उसे मनाने को।  ...

नीरज नैथानी….. कुशला फूफू के आ जाने का मतलब था जच्चा-बच्चा की खैरियत

राष्ट्रीय
नीरज नैथानी रुड़की, उत्तराखंड मेरे गांव में बीमारियों का इलाज साथियों पिछली बार मैंने आपको बताया कि जब हमारे गांव में सड़क नहीं पहुंची थी तो किसी बीमार को डाक्टर के पास दिखाने के लिए पिनस पर ले जाते थे। लेकिन, मैं जिक्र करना भूल गया कि डाक्टर के पास ले जाने की नौबत ही बहुत कम आती थी। अब आप इसका यह मतलब कतई न निकालिएगा कि हमारे गांव में कोई बीमार ही नहीं पड़ता था। गाहे-बगाहे मौसम का मिजाज बदलने पर या बदपरहेजी होने की वजह से लोगों की तवियत बिगड़ा ही करती थी। उस जमाने में गांव में न तो राजकीय प्राथमिक चिकित्सा केंद्र (पीएचसी), न  डाक्टर, न कम्पाउंडर और न ही कोई मेडिकल स्टोर हुआ करता था। लेकिन, हर बीमारी के इलाज के पारम्परिक तरीके जरूर हुआ करते थे। मसलन, किसी घर में बहू को प्रसव होना‌ है तो गांव की कुशला फूफू की सेवाएं ली जाती थीं। साठ-पैंसठ के आसपास की उम्र की कुशला फूफू पास...
सीबीएसई बोर्ड के 12वीं कक्षा का रिजल्ट आएगा 30 जुलाई को

सीबीएसई बोर्ड के 12वीं कक्षा का रिजल्ट आएगा 30 जुलाई को

राष्ट्रीय
शब्द रथ न्यूज, ब्यूरो (shabd rath news)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम जारी करने की तिथि घोषित कर दी है। 12वीं का रिजल्ट 30 जुलाई को जारी किया जाएगा। वहीं, दसवीं के छात्रों को रिजल्ट के लिए करीब 5 दिन का इंतजार करना होगा। अगस्त के इसके हफ्ते 10 वीं का रिज़ल्ट जारी होगा सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक रणवीर सिंह ने कहा कि रिजल्ट तय समय में जारी किया जाएगा। 12वीं कक्षा का परिणाम 30 जुलाई और दसवीं कक्षा का रिजल्ट अगस्त के पहले सप्ताह में जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि सीबीएसई 20 जुलाई को रिजल्ट घोषित करने वाला था। लेकिन, रिज़ल्ट जारी नहीं हो पाया। अब 30 जुलाई यानी कल रिजल्ट घोषित किया जाएगा।...
वरिष्ठ साहित्यकार भारती पाण्डे की एक कविता.. सखी! सावन आया है

वरिष्ठ साहित्यकार भारती पाण्डे की एक कविता.. सखी! सावन आया है

राष्ट्रीय
भारती पाण्डे देहरादून, उत्तराखंड ------------------------ सावन आया है .... तप्त धरा संतृप्त, हृदय असंतृप्त कृष्णमेघ कौतुकी, अवनी अंबर संपृक्त झर झर झर पावस सर्वत्र समाया सखी! सावन आया है। ताल-नद जलाकंठ, नहीं कोई रिक्त नदी-कछारों में, हरियर मुस्काया सखी! सावन आया है। श्यामल दिग–दिवस साँझ, झूमें तरु-पीपर पात स्वप्न जागे मन-मन में प्रेम अकुलाया सखी! सावन आया है। मेघों का गर्जन दामिनी–नर्तन मन मयूर चहका, नूपुरों की रुनझुन श्रावणी-कजरी युगल गीत गाया सखी! सावन आया है। वेगवती चलीं सागर की ओर प्रिय-मिलन आतुरता अहो! उमंग–पुरजोर नेह भरे चंचल चित्त-प्रीत की माया सखी! सावन आया है। सुन री सखी! ऋतु सावन-धनी हेरन-सुधबुद्ध कहाँ रे सखी! कोयल की कूक, अमराई-झूले गाँव की गैल-छैल, स्मृतियों के रेले पुलकित तन-मन, मेहंदिया गंध क्षितिज से क्षितिज तक इंद्रधनु छाया सखी! सा...

नीरज नैथानी… उस जमाने में इमरजेंसी एम्बुलेंस होती थी ‘पिनस’

राष्ट्रीय
नीरज नैथानी रुड़की, उत्तराखंड मेरे गांव की पिनस अपने गांव के संदर्भ में, मैं आपके साथ एक पुरानी किंतु रोचक जानकारी साझा करना चाहता हूं। आज से तकरीबन चालीस पैंतालीस साल पहले हमारे गांव के ऊपर पिछड़े पहाड़ी इलाके का ठप्पा लगा हुआ था। वैसे अनेक संदर्भों में यह पिछड़ा था भी, जैसे कि गांव में बिजली नहीं थी, सड़क नहीं थी, यातायात के साधन नहीं थे, निकटतम बाजार जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं थी और सबसे बड़ी बात स्वास्थ्य सुविधाओं का नितांत अभाव था। ऐसे में यदि कोई गांव में बीमार पड़ गया, उसे किसी उपचार की आवश्यकता है, किसी अस्पताल ले जाना है, किसी डाक्टर को दिखाना है और वह पैदल चलने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है तो फिर काम आती थी पिनस। हां, जी पिनस। यह पालकी जैसी लकड़ी की संरचना होती थी। जिसमें उपचार के लिए रोगी को आराम मुद्रा में अधलेटा कर...
2 अगस्त से स्कूल खोलने पर एसोसिएशन ने जताई आपत्ति

2 अगस्त से स्कूल खोलने पर एसोसिएशन ने जताई आपत्ति

राष्ट्रीय
-नेशनल एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (NAPSR) ने जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन शब्द रथ न्यूज, ब्यूरो (shabd rath news)। नेशनल एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (NAPSR) ने 2 अगस्त से स्कूल खोलने के सरकार के निर्णय पर लेकर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने आज जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। मांग की गई है कि जब तक बच्चों के लिए वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक स्कूल न खोले जाएं। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान ने बताया कि पिछले वर्ष से शासन/प्रशासन को बार-बार अवगत कराया जा रहा है कि जब तक कोरोना महामारी पूर्णतया समाप्त न हो जाये, तब तक विद्यालय नहीं खोले जाने चाहिए। क्योंकि, अभी तक 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन नही आई है। लेकिन, उत्तराखंड सरकार ने 2 अगस्त से स्कूल खोलने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बच्च...

परेशानी: स्मार्ट सिटी देहरादून के शोरूम व दुकानों में घुसा बारिश का पानी

राष्ट्रीय
शब्द रथ न्यूज, ब्यूरो (shabd rath news)। देहरादून में मंगलवार रात से बारिश जारी है। बारिश के कारण देहरादून के विभिन्न इलाकों में जलभराव के कारण लोग परेशान हैं। हालात यह हैं कि स्मार्ट सिटी बन रही देहरादून के मुख्य बाजारों के शोरूम व दुकानों में पानी घुस रहा है। देहरादून के वीआईपी क्षेत्र राजपुर रोड के एक शोरूम में भी पानी घुस गया।गांधी पार्क के सामने सैमसंग शोरूम के कर्मचारियों ने सुबह में जब शोरूम खोला तो शोरूम के अंदर पानी ही पानी था। बारिश के कारण कई अन्य दुकानों में भी पानी भर गया। दुकानदारों का कहना है स्मार्ट सिटी के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों जो काम हुआ, उससे दुकानों के आगे के फुटपाथ काफी ऊपर हो गए हैं। पानी की निकासी न हो होने के कारण दुकानों व शोरूम के अंदर पानी घुस रहा है। इससे दुकानदारों को परेशानियां बढ़ गई हैं।...

नीरज नैथानी… मेरे गांव की गोठ

राष्ट्रीय
नीरज नैथानी रुड़की, उत्तराखंड ------------------------------------- मेरे गांव की गोठ पहाड़ी गांवों से जब इस कदर पलायन नहीं हुआ था तथा गांव, घर-परिवारों व पशुओं से भरपूर बने हुए थे, उस समय गोठ परम्परा प्रचलन में थी। जैसा हम जानते ही हैं कि पहाड़ी खेत आकार व क्षेत्रफल में छोटे होने के साथ ही सीढ़ीनुमा होते हैं। अत: इन खेतों में अच्छी फसल के लिए जैविक खाद पंहुचाना दुष्कर कार्य होता था। इस समस्या के निराकरण के लिए ही गांव में गोठ परम्परा स्थापित की गयी। गांव के तीन-चार परिवार मिल कर अपना समूह बना लेते थे। प्रात: उस समूह के एक दो सदस्यों के नियंत्रण में उनके समस्त पशु विशेषकर गाय, बैल, बछड़ा, बछिया बकरी आदि चराने के लिए जंगल ले जाए जाते। हांलाकि, वे निरंतर अभ्यास के कारण स्वत: ही चलते जाते व गौचर मैदान में अपनी इच्छा से चारा चरते तथा शाम होने पर स्वभाविक रूप से अपने आप ही लौटने भी ल...