शिक्षा: बदलते भारत की सबसे बड़ी जरूरत
शिक्षा: बदलते भारत की सबसे बड़ी जरूरत
शीतल सकलानी (यू.सी.एन)
शिक्षा केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे समाज की नींव है जो जागरूक, सक्षम और आत्मनिर्भर हो। किसी भी देश की वास्तविक ताकत उसके प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके शिक्षित नागरिकों से तय होती है। इसलिए शिक्षा को केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।
आज भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। विज्ञान, तकनीक, डिजिटल क्रांति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में शिक्षा की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद देश की शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता में अंतर, सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी, निजी शिक्षा की बढ़ती लागत, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और रोजगार के अनुरूप कौशल की कमी आज भी गंभ...