पुलिस के लिए पहेली बनी रिवाल्वर की कहानी, 23 साल बाद अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज |
पुलिस के लिए पहेली बनी रिवाल्वर की कहानी, 23 साल बाद अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज |
हत्या में इस्तेमाल की गई रिवाल्वर के गायब होने का मामला उलझता चला गया। कई कोशिशों के बावजूद पुलिस की उम्मीदों पर पानी फिर गया। वर्ष 1999 में बैलेस्टिक एक्सपर्ट की जांच के लिए रिवाल्वर फोरेंसिक लैब आगरा भेजी गई थी।
वर्ष 1999 में दर्ज हत्या की कोशिश के मुकदमे में बरामद रिवाल्वर के गायब होने का मामला पुलिस के लिए एक पहेली बनकर रह गया है। उस समय बैलेस्टिक जांच के लिए पुलिस लाइन से रिवाल्वर रिसीव करने वाले एसआई 80 वर्ष के हो चुके हैं। उन्हें कुछ याद नहीं है।
घटना के दौरान के अभिलेख आमद एवं रवानगी जीडी से जुड़े रिकॉर्ड 2005 में ही नष्ट किए जा चुके हैं। ऐसे में पुलिस की इस उम्मीद पर भी पानी फिर गया। मामले में देहरादून से बुलंदशहर तक पत्राचार हुआ, लेकिन उसका नतीजा भी सिफर रहा। अब जांच अधिकारी की सिफारिश पर इस...





