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Day: August 6, 2021

टोकियो ओलंपिक: हारकर भी देश का दिल जीत गई भारत की महिला हॉकी टीम

टोकियो ओलंपिक: हारकर भी देश का दिल जीत गई भारत की महिला हॉकी टीम

खेल
-टोकियो ओलंपिक में भारत और ग्रेट ब्रिटेन की महिला हॉकी टीम ने एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार खेल दिखाया। ब्रिटेन ने पहला गोल कर बढ़त बनाई तो जवाबी हमले में भारत की लड़कियों ने जबरदस्त वापसी करते हुए गोल कर बढ़त ली। हालांकि, ग्रेट ब्रिटेन ने मैच को 4-3 से जीत लिया। लेकिन भारतीय लड़कियों ने दमदार खेल खेला। वह मैच भले ही कर गई। लेकिन, उन्होंने देशवासियों का दिल जीत लिया। भारत की बेटियों ने तोक्यो ओलिंपिक में आपने जिस तरह से खेल दिखाया आप निश्चित रूप से चैंपियन हैं। आपके लिए ये हार नहीं बल्कि जीत है। जीत उस धारणा के खिलाफ जो लोगों के मन में थी। आपने इस ओलिंपिक में जो यादगार सफर तय किया है लोगों ने तो इस बारे में बिल्कुल भी सोचा नहीं होगा। बेहद मजबूत मानी जानी वाली ऑस्ट्रेलिया पर जिस तरह आप लोगों ने जीत हासिल की उससे आप लोगों ने यह दिखा दिया कि जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी टीम को हराया जा सकता है। ल...
हॉकी प्लेयर वंदना कटारिया के पिता नहीं रहे, वंदना ने गोल्ड लाने का किया था वादा

हॉकी प्लेयर वंदना कटारिया के पिता नहीं रहे, वंदना ने गोल्ड लाने का किया था वादा

उत्तरप्रदेश, खेल
ओलिंपिक में महिला हॉकी के कांस्य पदक के लिए मुकाबले में भारतीय टीम ने ग्रेट ब्रिटेन को कड़ी टक्कर दी। टीम मैच हार गई लेकिन, वंदना कटारिया ने भी एक गोल दागा। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित घर में हॉकी प्लेयर वंदना कटारिया के भाई लखन कटारिया बहन के संघर्ष और पिता को याद कर फफक पड़े। तोक्यो ओलिंपिक में महिला हॉकी टीम का हिस्सा वंदना के भाई ने कहा कि बहन ने पिता से गोल्ड मेडल लाने का वादा किया था। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। अब पिता हमारे बीच नहीं हैं। बहन ने काफी संघर्ष किया है। उसने पापा के अंतिम दर्शन तक नहीं किए।...
वरिष्ठ कवि पागल फकीरा की एक ग़ज़ल… जीवन तो है खेल तमाशा, चालाकी नादानी है…

वरिष्ठ कवि पागल फकीरा की एक ग़ज़ल… जीवन तो है खेल तमाशा, चालाकी नादानी है…

राष्ट्रीय
पागल फकीरा भावनगर, गुजरात --------------------------------- ग़ज़ल जीवन तो है खेल तमाशा, चालाकी नादानी है, तब तक ज़िंदा रहते हैं, हम जब तक कि हैरानी है। आग, हवा, मिट्टी, पानी मिल कर रहते है कैसे ये, देख के ख़ुद को हैरां हूँ मैं, जैसे ख़्वाब कहानी है। मंज़र को आख़िर क्यूँ कर मैं, पहरों तकता रहता हूँ, ऊपर ठहरी चट्टानें है, राह में बहता पानी है। मुझको एक बीमारी है, तंद्रा में चलते रहने की, रातों में भी कब रुकता है, मुझ में जो सैलानी है। कल तक जिसने दुत्कारा, कह कह पागल पागल मुझको, दोस्त वही दुनिया तो अब फ़क़ीरा की दीवानी है।...
वरिष्ठ कवि जीके पिपिल की एक ग़ज़ल.. वही जिन्दगी वही जिन्दगी के समझौते हैं…

वरिष्ठ कवि जीके पिपिल की एक ग़ज़ल.. वही जिन्दगी वही जिन्दगी के समझौते हैं…

राष्ट्रीय
जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड -------------------------------- गज़ल --------------------- वही जिन्दगी वही जिन्दगी के समझौते हैं कभी करे जाते हैं कभी खुदबखुद होते हैं। हम सभी क़िरदार हैं जिन्दगी के नाटक में जो उजाले में हँसते हैं तो अँधेरे में रोते हैं। खिलाड़ी तो कोई और है हम तो मोहरे हैं जो बिसात की चादर पे हार जीत ढोते हैं। समन्दर की छोटी बड़ी हर लहर की तरह हम साँसों की डोर में सुख-दुख पिरोते हैं। नसीब मुक़द्दर ये मन बहलाने की बातें हैं हम काटते वही हैं जो भी कर्मो में बोते हैं। ज़िंदगी का अंत जब किसी को पता नहीं फिर क्यों हम भविष्य के सपने सँजोते हैं। किनारों पर तलाशने से कुछ नहीं मिलेगा मोती उन्हें मिले हैं जो लगाते गहरे गोते हैं। कोई कितने भी हष्टपुष्ट और बलशाली हैं मौत के आगे तो हम चने के दाने थोते हैं।...