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Day: August 7, 2021

जगदीश ग्रामीण की कलम से…  गडूल के गांधी जी!

जगदीश ग्रामीण की कलम से… गडूल के गांधी जी!

राष्ट्रीय
जगदीश ग्रामीण की कलम से गडूल के गांधी जी! --------------------------- आज मैं आपको मिलवाता हूं देहरादून जनपद के विकासखंड डोईवाला की क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी ग्राम पंचायत "गडूल" के इठारना गांव निवासी भगवान सिंह तोपवाल से। "इठारना गांव" नीलकंठ महादेव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यहां यूं तो पूरे वर्ष भर शिवभक्त और पर्यटक आते ही रहते हैं। लेकिन, सावन के महीने में हर सोमवार को यहां हजारों की तादाद में भक्त जन आते हैं। इस शिव मंदिर को यह भव्य रूप जिन्होंने दिया है वह हैं इसी गांव के एक कर्मयोगी भगवान सिंह तोपवाल। भगवान सिंह ग्राम पंचायत गडूल के पूर्व प्रधान हैं। भगवान सिंह धार्मिक प्रवृत्ति के सज्जन व्यक्ति हैं। बचपन में ही उनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया था। लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक अभिभावक के रूप में अपने भाइयों की शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था की। व...
कवि डॉ अलका अरोड़ा की एक रचना… नारी को सम्मान नहीं तो बताओ क्या दोगे…

कवि डॉ अलका अरोड़ा की एक रचना… नारी को सम्मान नहीं तो बताओ क्या दोगे…

राष्ट्रीय
डॉ अलका अरोड़ा प्रोफेसर, देहरादून ------------------------------------------ आओ करे ये सतत प्रतिज्ञा नारी को सम्मान नहीं तो बताओ क्या दोगे बेटी को घर में मान नहीं तो बतलाओ क्या दोगे एक घर सुधरने से बोलो क्या बदलेगा हर सोच बदलने का प्रण बोलो कब लोगे जब तक सारी कायनात ना बदले तो सब बेकार जब तक अर्न्तमन ना स्वीकारे हर तरफ है हार हर तरक्की हर ऊँचाई झूठी साबित होती है जब तक बेटी लुट रही घर भीतर और हाट बाजार लेकर प्रण सब बढे आगे तब ही होगा पूर्ण उद्धार शिक्षा खानपान रोजगार बेटी को देना होगा पुरस्कार हर बेटी सम्मान से जिये ख्याल हर पल रखना होगा बेटी को भी बेटो सा मिले बराबर का अधिकार कानून समाज और परिवेश से भी ले आओ सुधार हर शय लगाकर जगा सको तो बदल डालो ये संसार नारी जीवन पुण्य कर्मो का फल ही है ये जान जाओ सृष्टि की रचेचता को पग पग क्यूं कर रहे हो शर्मसार कौन स...
पुष्पा जोशी ‘प्राकाम्य’ के मित्रों को समर्पित मुक्तक…

पुष्पा जोशी ‘प्राकाम्य’ के मित्रों को समर्पित मुक्तक…

राष्ट्रीय
पुष्पा जोशी 'प्राकाम्य' ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड ----------------------------------------- मुक्तक (१) खुशी दें, दिल को दें राहत, सहृदय सद्वृत्त रहते हैं। रहें दिल में सहोदर-से, उन्हीं को मित्र कहते हैं। बचाते हैं बुराई से, छिपाते जग से हैं कमियाँ- महकते हैं, जो महकाते, सुगंधित इत्र कहते हैं। (2) राज दिल के कई ऐसे, कहें किससे! हिचकते हम। कि दर्दे ग़म बयां करके, मित्र संग हैं सिसकते हम। पावन,मन लुभावन ये, इन्हें सन्मित्र कहते हैं ‌। अनुपम हैं सहोदर-से, नहीं इनसे झिझकते हम।    ...
युवा कवि धर्मेन्द्र उनियाल धर्मी की एक ग़ज़ल… बस हमने हाथ न पसारा, खुद्दारियों के चलते…

युवा कवि धर्मेन्द्र उनियाल धर्मी की एक ग़ज़ल… बस हमने हाथ न पसारा, खुद्दारियों के चलते…

राष्ट्रीय
धर्मेन्द्र उनियाल 'धर्मी' चीफ फार्मासिस्ट, अल्मोड़ा ------------------------------------------------- - बस हमने हाथ न पसारा, खुद्दारियों के चलते, कर लिया सबसे किनारा ,खुद्दारियों के चलते! अदब के सिवा सिर झुकाना मंजूर नही हमे, हमे मंजूर है हर ख़सारा, खुद्दारियों के चलते! पहले सिर झुका लेते, शायद बच गये होते, हम लुटे हैं फिर दोबारा, खुद्दारियों के चलते! फ़क़त वो चाँद ही आसमां का चहेता बन रहा, टूटा फ़लक से सितारा, खुद्दारियों के चलते! खुशामदी को उम्रभर हमने दरकिनार ही रखा, किसी रहनुमा को न पुकारा, खुद्दारियों के चलते! मैं ज़िन्दगी की भीख़ मांग लूं, ये हो नही सकता, है ज़हर ही आख़िरी चारा, खुद्दारियों के चलते!!  ...