Saturday, June 20News That Matters

Day: August 9, 2021

युवाओं के लिए बंपर नौकरियां, आयोग ने जारी की विज्ञप्ति

युवाओं के लिए बंपर नौकरियां, आयोग ने जारी की विज्ञप्ति

उत्तराखण्ड
शब्द रथ न्यूज, ब्यूरो (shabd rath news)। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने विभिन्न पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की है। अभ्यर्थियों की ऑनलाइन आवेदन करना है। आवेदन 9 अगस्त से शुरू हो जाएंगे और आवेदन करने की अंतिम तिथि 29 अगस्त है। 29 अगस्त को ही फीस जमा करने की भी अंतिम तिथि है। अति महत्वपूर्ण निर्देश : अभ्यर्थी अपने ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज आरक्षण से सम्बन्धित धारित सभी श्रेणी / उप श्रेणी का अंकन ऑनलाइन आवेदन पत्र में अवश्य करें। आरक्षण का दावा न किये जाने की दशा में रिट याचिका (स्पेशल अपील) संख्या: 79 / 2010 राधा मित्तल बनाम उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग में मा० उच्च न्यायालय, नैनीताल द्वारा पारित आदेश दिनांक 08.06.2010 तथा विशेष अनुज्ञा याचिका (सिविल) नं० (एस ) 19532 / 2010 में मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के क्रम में अभ्यर्थी को आरक्षण का लाभ कदापि अनुमन्य नहीं होगा। आरक्षण विषयक प्रमाण पत...
वरिष्ठ कवि पागल फ़क़ीरा की एक ग़ज़ल… मुझको पत्थर दिल से मोहब्बत हुई है…

वरिष्ठ कवि पागल फ़क़ीरा की एक ग़ज़ल… मुझको पत्थर दिल से मोहब्बत हुई है…

राष्ट्रीय
पागल फ़क़ीरा मुझको पत्थर दिल से मोहब्बत हुई है, मुझसे इश्क़ में थोड़ी सी शरारत हुई है। मुझ पर लगी तोहमत की ख़ातिर ही तो, मोहब्बतों के दुश्मन से बग़ावत हुई है। तुम्हारी ग़म-ए-जुदाई में तड़पता रहता हूँ, मुझे ख़ुद अपने आप से नफ़रत हुई है। प्रेमियों के जुदाई का दर्द दूर करने को, मुक़द्दस रूह से थोड़ी सी शराफ़त हुई है। मोहब्बत को भूल गई तू गैर की ख़ातिर, मुझको दिल जलाने की आदत हुई है। तुम्हारे नाम कर चुका था ज़िन्दगी सारी, इश्क़ में मेरे नाम की फ़जीहत हुई है। इश्क़ को फ़क़ीरा ने अपना ख़ुदा बनाया, उस ख़ुदा की थोड़ी सी इबादत हुई है।  ...
चिन्तन करें कि शिवजी की सवारी नंदी (बैल) का क्या अभिप्राय है?

चिन्तन करें कि शिवजी की सवारी नंदी (बैल) का क्या अभिप्राय है?

आध्यात्मिक
भगवद चिन्तन.. श्रावण मास शिव तत्व भगवान शिव की आराधना के पवित्र श्रावण मास में चिन्तन करें कि शिवजी की सवारी नंदी (बैल) का क्या अभिप्राय है? बैल अर्थात धर्म, बैल धर्म का स्वरूप है। बैल की सवारी करना अर्थात प्रत्येक कर्म धर्मानुसार करना। जिस मनुष्य के जीवन में धर्म नहीं वह साधन सम्पन्न रहने पर भी दुखी ही रहता है, जहाँ धर्म रुपी साधना है वहाँ साधनों के अभाव में भी सुख और शांति है। प्रसन्नता भीतर की स्थिति है। धर्माचरण करने से नव संकल्पों का सृजन होता है और भीतर तृप्ति बनी रहती है। महादेव प्रत्येक क्षण इसलिए प्रसन्न नहीं रहते कि उनके पास साधन हैं बल्कि इसलिए प्रसन्न रहते हैं कि उनके पास धर्म रुपी साधना है। शिव धर्म पर सवार हैं इसीलिए वो महादेव हैं। हमें ये समझना होगा कि सुख धन नहीं धर्म से ही प्राप्त होगा।...