Saturday, June 20News That Matters

Month: August 2021

युवा कवि धर्मेंद्र उनियाल ‘धर्मी’ की गढ़वाली कविता… यू कोराना कू काल छ

राष्ट्रीय
धर्मेंद्र उनियाल 'धर्मी' चीफ़ फार्मासिस्ट, अल्मोड़ा ------------------------------------- यू कोराना कू काल छ, फूटियूं सबूकू कपाल छ। कैकी ह्वईं मुखडी सफेद, कैकी पट कैक लाल छ। १ यू कोराना कू काल छ, फूटियूं सबूकू कपाल छ। होटल वाला भूखा मरना, गौं मा मजूरी ध्याड़ी करना। कैमा नी छ आटू न चौंल, कैमा भुज्जी न दाल छ।२ यू कोराना कू काल छ। कुछ मरयन अस्पतालू मा, कुछ सरकारी फेर जालू मा भैर त सब भलू बतौणा पर भीतर बुरू हाल छ।३ यू कोराना कू काल छ। काम धंधा चौपट ह्वैग्यन, लक्ष्मण रेखा चौखट ह्वैग्यन जनू पिछल्यू साल गुजरी, यू भी त वनी साल छ।४ यू कोराना कू काल छ। मंहगाई की रेल निकली, हमारू तुम्हारु तैल निकली। अर्थव्यवस्था डूबी गै पर, मंहगाई त मा उछाल छ।५ यू कोराना कू काल छ। स्कूलू मा लग्यां ताला, काई सेंवालू मोटा जाला फीस त हम तैं देण पड़ी। यू ऑनलाइन क...

नीरज नैथानी… जब गालियां देते-देते दोनों पक्ष थक जाते तो अघोषित युद्ध विराम हो जाता

राष्ट्रीय
नीरज नैथानी रुड़की, उत्तराखंड -------------------------------------------- पर्वतीय गांवों में सुनहरी लड़ाई साथियों पिछली बार मैंने बताया था कि पहाड़ी खेतों में ओडु कई बार लड़ाई-झगड़े की जड़ हुआ करते थे। हांलाकि, ओडु के अलावा भी तमाम सारी वजहें थीं झगड़ो की। वैसे देखा जाय तो पहाड़ी व मैदानी गांव‌ के लड़ाई-झगड़ों में बुनियादी फर्क है। जहां मैदान के कतिपय गांवों में रुतबा व रुवाब जमाने के लिए या अपनी दबंगई स्थापित करने के लिए लाठी-गोलियां चल जाना आम बात है वहीं, अधिकाशंत: पहाड़ी गावों में केवल जुबानी लड़ाई से ही भड़ास निकाल लिये जाने का रिवाज है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि पहाड़ी खेत आकार व क्षेत्रफल में बहुत छोटे होते हैं। इनमें खेती करना अत्यंत श्रम साध्य होता है। जितनी मेहनत की जाती है उस अनुपात में उत्पादन भी कतई नहीं होता है। ऊपर से तुर्रा ये कि पड़ोसी के डगंर उजाड़ खा जाएं त...
तो हमारा घर भी बन सकता है शिवालय

तो हमारा घर भी बन सकता है शिवालय

आध्यात्मिक
भगवद चिन्तन... श्रावण मास शिव तत्व पवित्र श्रावण मास में शिवार्चन करते-करते एक सूत्र और सीखने योग्य है। भगवान् शिव की गृहस्थी को ध्यान से देखना कि कितने विरोधाभासी लोग भी बड़ी शांति से इस परिवार में रह रहे हैं। माँ पार्वती का वाहन शेर है और शिवजी का नंदी है। शेर का भोजन है वृषभ, लेकिन यहाँ कोई वैर नहीं है। कार्तिकेय का वाहन मोर है और शिवजी के गले में सर्प हैं। मोर और सर्प की लड़ाई भी जगजाहिर है लेकिन, यहाँ ये साथ ही रहते हैं। गणेश जी का वाहन चूहा है और चूहा सर्प का भोजन है। इस परिवार में सब शांति और सदभाव, निर्वैर बिना कलह के जीवन जीते हैं। देश काल, अलग जन्म, अलग जीवन, अलग विचार, अलग उद्देश्य होने के कारण सम्भव है आपकी घर में किसी से न बनें। मतभेद हो जाएँ कोई बात नहीं मनभेद नहीं होना चाहिए। सबकी स्वतंत्र चेतना का सम्मान करते हुए सबको आदर देवें तो हमारा घर भी शिवालय बन सकता है।...